शनिवार, 28 फ़रवरी 2009

उपाय : असलियत या फसाना

किसी भी ज्योतिषी, हस्तरेखाविद्, अंकशास्त्री या और किसी तरह के सलाहकार के पास से वापस आने पर जातक या क्लायंट के हाथ में होता है इस पर्चा जिसमें उस सलाहकार द्वारा सुझाए कुछ उपाय लिखे होते हैं। क्या वाकई इन उपायों से कुछ होता है? या यह किसी चंडूखाने की गप्पबाजी है।

निश्चित ही इस बात को पढ़ने के बाद अगर आपके जीवन में कभी इस तरह के उपायों को करने के बाद फायदा हुआ होगा तो आप इसके पक्ष में होंगे और अगर उपायों को करने के बाद भी आपकी कोई आस पूरी नहीं हुई होगी तो आप इसका विरोध करेंगे। आप कहेंगे उपाय वगैरह कुछ नहीं होते यह सब लोगों को लूटने के शगल हैं। आपका विचार इन दोनों में से कुछ भी हो एक बात शर्तिया कह सकता हूं कि अगर अब भी आपकी किसी समस्या का निवारण करने के लिए कोई उपाय बताया जाए तो विरोध करने वाले भी उसे करने से नहीं चूकेंगे। यह आकर्षण है उपाय का।

उपाय क्या होते हैं। अगर आप सोचें की आप के मन की इच्छाऐं पूरी करने के लिए उपायों का प्रयोग किया जा सकता है तो सबसे पहले तो अपने दिमाग से इस ख्याल को बिल्कुल निकाल दीजिए। उपायों का उपयोग सिर्फ जो आपके भाग्य में है और मिल नहीं पा रहा, उसे आप तक पहुंचाने में ही हो सकता है।

मूल रूप से उपाय दो तरह के होते हैं। पहला, वो जो आपकी कुंडली के अच्छे ग्रहों को बलवान करते हैं। दूसरा, वो जो आपकी कुंडली में बुरा असर देने वाले ग्रहों को रोकते हैं। इसके निर्णय के लिए भविष्यवक्ता को कोशिशें काम करती हैं। यह उसका काम है कि पहले तो वह देखे की पूछा गया प्रश्न जातक के भाग्य में है भी या नहीं! अब आप के मन में यह ख्याल आएगा की मनुष्य तो स्वतंत्र है फिर ज्योतिषी उसकी कुंडली से उसके भाग्य का सीमा निर्धारण कैसे कर सकता है?

इसे समझाने के लिए मैं आपको दो बातें बताना चाहूंगा। पहली, एक व्यक्ति ने दूसरे से पूछा की कर्म और भाग्य में क्या अंतर है? तो पहले ने कहा एक पैर उठा। दूसरे ने झट से दायां पैर उठा लिया। पहले ने कहा कि अब दूसरा पैर उठा। तो दूसरा बोला वो अब नहीं उठ सकता। पहला बोला यह अंतर है कर्म और भाग्य में। पहला पैर जो आपने उठाया वो आपका कर्म था। यह पूरी तरह आपके हाथ में था कि आप कौन सा पैर उठाते हैं। लेकिन एक पैर उठाते ही दूसरा बंध गया यह भाग्य है। यानि भाग्य कर्म पर आधारित होता है। कई बार कुछ इस तरह की बातें हो जाती हैं कि हमारे पहले कभी उठाए गए पैर की वजह से इस जन्म में हमारा भाग्य बंध जाता है। इस बंधन को तोड़ने के लिए उपाय की जरूरत होती है।

दूसरी बात यह कि जिस व्यक्ति को अपने प्रयत्नों से कुछ मिलना है ऐसे लोग बहुत कम ही भाग्य बंचवाने जाते हैं। मनुष्य के अनगिनत तरह के विचारों में मुख्यतः चार प्रकार के लोग होते हैं। इनहें लोगों की प्रवृति भी कह सकते हैं। लोगों की इस प्रवृति को जानने के बाद ही जो ज्योतिषी उपचार बताता है। उसे ही यश की प्राप्ति होती है। मनुष्य के चार स्वभाव और उपायों के तरीकों पर फिर किसी पोस्ट में चर्चा करूंगा। नमस्कार।

2 टिप्‍पणियां:

  1. नितिन जी
    नमस्‍कार
    वास्‍तव में इसी प्रकार की सरल चर्चा से ज्‍योतिष का वास्‍तविक विकास होगा। जो लोग सामान्‍य बातों को समझ सकते हैं। उनके सामने क्लिष्‍ट तथ्‍यों को पेश करना कोई बड़ी बात नहीं है। लोग एक बार पढ़ेंगे और आगे चल देंगे लेकिन सहज भाषा में कही गई बात गहरा असर करती है। आपके सकारात्‍मक सहयोग के लिए आभार।

    स्‍वास्तिक की ऊर्जा वाली बात मेरे लिए नई है। अच्‍छा है निरंतर आपसे कुछ न कुछ सीखता रहूंगा।

    ब्‍लॉग शुरू करने के लिए धन्‍यवाद।
    एक और सलाह इसे ब्‍लॉगवाणी और चिठ्ठाजगत से जोड़ दीजिए तो खूब पाठक भी मिलेंगे।

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  2. काफी खुश हुआ आपके विचार पढ़ के. ज्यादा ऊँचे दर्जे की बुद्धिमत्ता से ही ज्योतिष की अस्मिता संवरेगी .

    मेरे निजी ख्याल से कोई भी उपाय तभी कारगर हो सकता है जब सृष्टि की बड़ी योजना में उसका कोई प्रदान मुकरर हो. फ्री विल वाकई फ्री कितना होता है यह आप जेसे व्यक्ति को समझना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा.

    धन्यवाद .

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