धातु में उनसे संपर्क में रहने पर प्रभावित
करने की क्षमता होती है। आज का आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि बहुत से लोग कई तरह
के धातुओं के प्रति एलर्जिक होते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी धातु के प्रति एलर्जिक
है और वो लगातार उसके संपर्क में बना रहता है तो उसको कुछ शारीरिक परेशानियां हो
सकती हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी जातक को स्वर्ण से एलर्जी है और वो सोने की
अंगूठी पहनता है तो इससे उसे शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं।
व्यक्ति के लिए इन स्वास्थ्य के लिए बुरे या नकारात्मक धातुओं की ही
भांति शुभ धातु भी होते हैं। इस तरह, इन रत्नों का प्रभाव केवल व्यक्ति के शरीर,
स्वास्थ्य और सोचने के तरीके पर ही पड़ता है। यह न इससे अधिक कुछ दे सकते हैं और
ना ही इनसे कुछ अधिक करवाया जा सकता है। कुंडली की सहायता से यह अवश्य जाना जा
सकता है कि व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए कौन सी धातु या रत्न शुभ रहेंगे।
आइए अब देखते हैं कि यह धातु या रत्न किस तरह कार्य करते हैं। मान
लीजिए कोई कहते हैं कि आजकल उसकी मन शांत नहीं रहता है। ज्योतिषी उसकी कुंडली
देखकर उसे वह धातु या रत्न धारण करने की सलाह दे सकते हैं जिससे वो पुनः मन की
शांति पा सके। किसी रत्न या धातु को धारण करके वो अपने मन को पुनः कैसे शांत कर
सकता है? जैसा कि
पहले बताया गया है कि धातु हमारे स्वास्थ्य और सोचने के तरीके को प्रभावित करते
हैं। इसी तरह किसी रत्न या धातु से सोचने के तरीके को बदला जा सकता है।
जैसा कि आप
जानते हैं कि किसी भी व्यक्ति के मन की शांति तभी भंग होता है जब वो अपने साथ घटने
वाली घटनाओं के संबंध पर बढ़ा-चढ़ाकर विचार करने लगता है। रत्न पहनने से प्राप्त
खुशी से उसका सोचने का तरीका बदल जाता है और वो चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर देखना बंद कर
देता है। इस कारण वो अपने आसपास घटनाएं उसी तरह घटते रहने के बावजूद वो उन्हें
लेकर परेशान नहीं होता। अतः धातु या रत्नों का उपयोग स्वास्थ्य समस्याओं, मानसिक
शांति, सोचना का ढंग और लोगों का सामना करने के तरीके पर विशेष रूप से पड़ता है।
लेकिन कुंडली के किसी रत्न या पदार्थ को पहनने की अनुमति ना मिलने पर
इनसे किसी तरह की मदद नहीं मिल पाती। ऐसे समय हमें यह सोचना होगा कि हम किस तरह का
रत्न या धातु पहनने के सलाह दे सकते हैं।
किसी भी तरह की धातु या रत्न पहनने पर उससे संबंधित ग्रह बलवान हो जाता है। वह बलवान ग्रह कुंडली में अपनी दिशा व स्थिति को भी बलवान व शक्तिशाली बना देता है। उदाहरण के लिए यदि किसी की कुंडली में चौथे भाग में मंगल अपनी नीच राशि कर्क में बैठा है और वह जातक मानसिक रूप से अशांत होने की शिकायत करने तो ऐसे में ज्योतिषी को क्या सुझाव देना चाहिए?
इस परिस्थिति में चौथे भाव में बैठा नीच का मंगल मानसिक शांति को भंग
करने वाली परिस्थितियां उत्पन्न कर देता है। इन हालातों में जातक को मूंगा पहनने
की सलाह देने से उसका यह मंगल और अधिक उग्र हो जाएगा और इससे जातक की परेशानी बढ़
सकती है। इन हालातों में आपको उस ग्रह का रत्न पहनने का सुझाव देना चाहिए जिसकी
राशि चौथे भाव में है। जैसे इस मामले में चतुर्थ भाव में चंद्रमा की कर्क राशि
होने के कारण जातक को मोती पहनने के सलाह दी जा सकती है।
इसी तरह यदि मकर राशि में नीच का वृहस्पति लग्न में बैठा हो और जातक
खराब स्वास्थ्य की बात कहे तो वृहस्पति से संबंधित धातु या रत्न पहनने की सलाह कभी
ना दें क्योंकि ऐसा करने पर यह वृहस्पति और अधिक बलवान होकर जातक के स्वास्थ्य को
और अधिक हानि पहुंचा सकता है। ऐसी परिस्थितियों में लग्न के स्वामी ग्रह, यहां पर
शनि, को बलवान बनाना होगा जिसके लिए नीलम या लोहे का छल्ला पहनने की सलाह दी जा
सकती है।
लेकिन मान लीजिए, उपरोक्त परिस्थितियों में शनि भी नीच राशि का हो तो
हम जातक को स्वास्थ्य के लिए कुछ भी पहनने की सलाह नहीं दे सकते क्योंकि ऐसा होने
पर वृहस्पति और शनि दोनों ही ग्रहों का प्रभाव स्वास्थ्य खराब करने वाला होगा और
इनसे संबंधित रत्न या धातु पहनना स्वास्थ्य को और अधिक खराब कर देगा।
ऐसे मामले में, हमें चंद्र लग्न की सहायता लेनी होगी और जातक को चंद्र लग्न के स्वामी से संबंधित धातु या रत्न पहनने की सलाह दे सकते हैं।
इस तरह हमने देखा कि जब किसी भाव में कोई ग्रह नीच राशि का हो तो हम
उस भाव के स्वामी से संबंधित ग्रह या रत्न पहनने के सलाह दे सकते हैं, और यदि वह
भाव स्वामी स्वयं नीच राशि में हो तो हमें चंद्र लग्न की सहायता लेनी चाहिए।
चलिए एक और उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए किसी जातक की कुंडल में सप्तम
भाव में कन्या राशि में नीच का शुक्र बैठा है और वह अपनी पत्नी के साथ निरंतर
झगड़ा रहने की बात करता है। ऐसी स्थिति में उस जातक को शुक्र का रत्न या धातु
पहनाने हालात तथा उन दोनों के बीच का रिश्ता और भी अधिक खराब हो जाएंगे। ऐसे में
उस जातक को बुध की धातु या रत्न पहनने की सलाह देनी चाहिए जिससे उसके सप्तम भाव को
बल मिलेगा। इससे उसका सोचने का तरीका या कहिए उसका अपने जीवनसाथी से व्यवहार करने
के तरीके में बदलाव आएगा और उनकी बीच के झगड़े शांत होते जाएंगे। लेकिन यदि उस
जातक के भाग्य में तलाक होने के योग होंगे तो धातु या रत्न पहनने से उसे रोका नहीं
जा सकता। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उसका सप्तम भाव किस हद तक दूषित है।
रत्न जातक के स्वभाव को अपने स्वामी ग्रहों के अनुरूप बना देते हैं। जैसे
सूर्य या मंगल का रत्न व्यक्ति में क्रोध की मात्रा को बढ़ा सकता है। वहीं
वृहस्पति, चंद्रमा, शुक्र और बुध जैसे शांत ग्रह व्यक्ति के स्वभाव को अधिक शांत
बनाते हैं। वहीं शनि का रत्न जातक में चालाकी और स्वार्थ की भावना को बढ़ा देता है
और राहु व केतु के रत्न मानसिक परेशानियों का कारण बन सकते हैं।
रत्नों से केवल तभी मदद मिल सकती है जब समस्याएं प्रत्यक्ष या क्षणिक
हों। भाग्य के लिखे को रत्न पहनकर बदला नहीं जा सकता।