गुरुवार, 9 अप्रैल 2009

रूद्राक्षः शिव का वरदान भाग-1

रूद्राक्ष को शिव की आंख कहा जाता है। रूद्राक्ष पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक फल है। मुख्यतः यह पेड़ नेपाल, इंडोनेशिया और भारत में पाया जाता है। इस पेड़ पर छोटे व मजबूत फल लगते हैं जिनका आवरण उतारने पर अंदर से मजबूत गुठली वाला फल मिलता है जिसे रूद्राक्ष कहते हैं।

रूद्राक्ष का धार्मिक महत्व होने के साथ ही इसका प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में भी होता है। इसमें इतने चुंबकीय गुण होते हैं कि असली रूद्राक्ष की माला पहनने पर ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों में भी लाभ होता है।

असली और पके हुए रूद्राक्ष में विद्युत शक्ति होती है तथा शरीर के साथ रगड़ खाने पर इसमें से निकलने वाली उर्जा मनुष्य को शारीरिक व मानसिक से लाभ देता है। यहां तक की चील जैसे विभिन्न पक्षी पके हुए रूद्राक्ष को अपने घोंसले में रखते हैं।

रूद्राक्ष के बीचों-बीच एक सिरे से दूसरे सिरे तक एक रेखा होती है जिसे मुख कहा जाता है। रूद्राक्ष में यह रेखाएं या मुख एक से 14 मुखी तक होते हैं और कभी-कभी 15 से 21 मुखी तक के रूद्राक्ष भी देखे गए हैं। आधी या टूटी हुई लाईन को मुख नहीं माना जाता है। जितनी लाईनें पूरी तरह स्पष्ट हों उतने ही मुख माने जाते हैं।

एक मुखी- सूर्य, दो मुखी-चंद्र, तीन मुखी-मंगल, चार मुखी-बुध, पांच मुखी-गुरू, छः मुखी-शुक्र, सात मुखी-शनि, आठ मुखी-राहू, नौ मुखी-केतू, 10मुखी-भगवान महावीर, 11मुखी-इंद्र, 12मुखी-भगवान विष्णु, 13मुखी- इंद्र, 14मुखी- शनि, गौरी शंकर और गणेश रूद्राक्ष पाए जाते हैं।

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