मंगलवार, 19 मई 2009

पर्स में किसकी तस्वीर रखें

कल मैंने एक कहानी पढ़ी। अच्छी लगी इसलिए ब्लाग पर डाल रहा हूं। शायद आप को भी जंचे। कहानी यह है कि एक ट्रेन में एक टीटी को पर्स पड़ा मिला। उसने घोषणा की कि अगर किसी का पर्स खोया हो तो बताए। एक साठ साल का आदमी आया और उस पर्स को अपना बताने लगा। टीटी के निशानी पूछने पर उस बूढे़ आदमी ने कहा कि उसमें भगवान कृष्ण की फोटो है। बात सही थी, लेकिन यह कोई ठोस प्रमाण नहीं है, टीटी ने कहा। सुनकर बूढ़ा थोड़ा हंसा और कहने लगा, मैं तुम्हें इस तस्वीर के पीछे की कहानी बताता हूं।

मेरे पिता सरकारी अधिकारी थे। जब उन्होंने मुझे जेबखर्च देना शुरू किया तब मुझे यह पर्स दिया था। तब मैंने इस पर्स में अपने माता-पिता की तस्वीर लगाई थी। जब मैं थोड़ा बड़ा हुआ तो उसमें मैने अपनी तस्वीर लगा ली। कुछ साल बाद मेरी शादी हुई। मेरी पत्नी बहुत सुंदर थी और जल्द ही मेरे पर्स में मेरी जगह मेरी पत्नी की तस्वीर लग गई।

कुछ समय बाद मेरे बेटा हुआ और पर्स की तस्वीर फिर बदल गई। अब मेरे पर्स में मेरे बेटे की तस्वीर थी। इसी तरह कई साल निकल गए। मेरे माता-पिता का देहांत हो गया। कुछ समय पहले मेरी पत्नी की भी मृत्यु हो गई। मेरा बेटा पढ़ने के लिए विदेश गया था, उसने वहीं नौकरी करी और शादी भी कर ली। अब वो वहीं बस गया है।

उस से अलग हुए इतने साल हो गए की मैं उसकी शक्ल भी भूलने लगा हूं। अब हालत यह है कि मुझे वाकई लगता है कि भगवान के अलावा हमारा सच में कोई नहीं है। अब मेरे पास ऐसा कोई नहीं जिसकी तस्वीर मैं पर्स में रख सकूं। अब सिर्फ मेरे इष्ट कृष्ण ही मेरे रह गए हैं।

यह कहानी सुनकर टीटी ने पर्स उस बूढ़े को वापस दे दिया और अगले स्टेशन पर टीटी उतर गया। अपने इष्ट देव का चित्र खरीदने के लिए। तो आपके पर्स में किसकी तस्वीर है?

1 टिप्पणी:

  1. नि‍तिनजी बहुत दिन हो गए आपने कोई नई पोस्‍ट नहीं लिखी। लिखने का क्रम तो जारी रखें। इससे नए आइडिया भी मिलते रहेंगे।

    आपकी नई पोस्‍ट के इंतजार में...

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